हरियाणा की MD यूनिवर्सिटी में हाईवोल्टेज ड्रामा, कुलपति का फैसला और राज्यपाल का बड़ा कदम
हरियाणा की मशहूर शिक्षण संस्था महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। कुलपति का कार्यकाल समाप्त होने से ठीक पहले विश्वविद्यालय में घटनाओं की ऐसी कड़ी देखने को मिली, जिसने रोहतक से लेकर चंडीगढ़ तक हलचल मचा दी।
कुलपति प्रो. राजबीर सिंह के कार्यकाल की समाप्ति से पहले कार्यकारी परिषद (EC) की बैठक, भर्तियों को मंजूरी देने की कोशिश, कुलसचिव का निलंबन और फिर राज्यपाल द्वारा बहाली—इन सब घटनाओं ने पूरे मामले को और भी गंभीर बना दिया है।
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| हरियाणा विश्वविद्यालय अपडेट |
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार 23 फरवरी को कुलपति का कार्यकाल पूरा होना था। इससे पहले 302वीं कार्यकारी परिषद की बैठक बुलाई गई।
24 जनवरी को हरियाणा के उच्चतर शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि बैठक को आगे बढ़ाया जाए और बिना सरकारी अनुमति किसी भी नियुक्ति आदेश को जारी न किया जाए।
इसके बावजूद बैठक आयोजित की गई और नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का प्रयास हुआ।
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27 फरवरी को उच्चतर शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से पत्र जारी कर 302वीं बैठक को सरकारी निर्देशों के खिलाफ बताया गया। साथ ही प्रस्तावित 304वीं बैठक को भी स्थगित करने के निर्देश दिए गए।
बताया जा रहा है कि 304वीं बैठक में पिछली बैठक की पुष्टि कर भर्तियों पर अंतिम मुहर लगाई जानी थी।
देर रात निलंबन की कार्रवाई
20 फरवरी की रात करीब 11 बजे कुलपति ने कुलसचिव डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता को निलंबित कर दिया। आदेश उनके निवास पर भेजे गए।
इसी दौरान कुलसचिव ने भी शाखा अधिकारियों को बैठक में भाग न लेने के निर्देश जारी किए।
वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. नसीब सिंह गिल को भी उसी रात निलंबित किया गया। उस समय उनके परिवार में विवाह समारोह चल रहा था, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
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मामले ने तब नया मोड़ लिया जब बुधवार सुबह करीब 11:40 बजे हरियाणा के राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने डॉ. कृष्ण कांत गुप्ता की बहाली के आदेश जारी कर दिए। साथ ही 304वीं कार्यकारी परिषद की बैठक को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया गया।
विश्वविद्यालय के जनसंपर्क निदेशक प्रो. आशीष दहिया ने भी पुष्टि की कि निर्धारित बैठक को फिलहाल टाल दिया गया है।
शिक्षक और छात्र संगठनों की मांग
शिक्षक एवं छात्र संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि विवादित भर्तियों को रद्द किया जाए और सभी निर्णय पारदर्शिता के साथ लिए जाएं।
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Q1. MDU रोहतक में विवाद किस कारण से हुआ?
कार्यकारी परिषद की बैठक और नियुक्तियों को मंजूरी देने को लेकर सरकार के निर्देशों की अनदेखी के कारण विवाद सामने आया।
Q2. कुलसचिव को क्यों निलंबित किया गया था?
बैठक से जुड़े प्रशासनिक फैसलों को लेकर कुलपति द्वारा निलंबन की कार्रवाई की गई थी।
Q3. राज्यपाल ने क्या फैसला लिया?
राज्यपाल ने कुलसचिव की बहाली के आदेश जारी किए और 304वीं EC बैठक को अगली सूचना तक स्थगित कर दिया।
Q4. क्या भर्तियों पर अंतिम फैसला हुआ है?
फिलहाल बैठक स्थगित है, इसलिए अंतिम निर्णय लंबित माना जा रहा है।
Q5. आगे क्या हो सकता है?
संभव है कि सरकार या विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाए।
