UPI New Rules 2026: 27 फरवरी से बदलेंगे डिजिटल पेमेंट के नियम, जानें क्या रहेगा नया
डिजिटल भुगतान अब रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह UPI से पेमेंट तेजी से हो रहा है। अगर आप भी नियमित रूप से National Payments Corporation of India द्वारा संचालित UPI सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं और ऐप्स जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm या बैंक की UPI सेवा का उपयोग करते हैं, तो यह अपडेट आपके लिए जरूरी है।
27 फरवरी 2026 से UPI लेनदेन से जुड़े कुछ नए दिशा-निर्देश लागू किए जा रहे हैं। इनका मकसद पेमेंट सिस्टम को ज्यादा सुरक्षित, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। इन बदलावों का असर आम यूजर्स और व्यापारियों दोनों पर पड़ेगा।
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| फेल्ड ट्रांजेक्शन रिफंड और व्यापारियों के लिए जरूरी नियम। पूरी जानकारी यहां पढ़ें। |
ट्रांजेक्शन लिमिट में क्या बदलाव?
UPI उपयोगकर्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल रोजाना ट्रांजेक्शन सीमा को लेकर होता है।
सामान्य यूजर्स के लिए प्रतिदिन ₹1 लाख तक की कुल सीमा पहले की तरह जारी रहेगी।
रोजमर्रा के भुगतान, बिल, शॉपिंग और पैसे ट्रांसफर में कोई बड़ा बदलाव नहीं है।
विशेष श्रेणी के भुगतान पर राहत
अस्पताल बिल, शिक्षा शुल्क और सरकारी टैक्स जैसे भुगतान के लिए अधिकतम सीमा ₹5 लाख तक रखी जा सकती है। इससे जरूरत के समय बड़ी रकम ट्रांसफर करना आसान होगा।
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यदि आपने नया UPI आईडी या हैंडल बनाया है, तो पहले 24 घंटे के भीतर आप अधिकतम ₹5,000 तक ही ट्रांजेक्शन कर पाएंगे। यह नियम फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी रोकने के उद्देश्य से लागू किया गया है।
KYC नियम हुए सख्त
अब UPI से जुड़े खातों के लिए KYC प्रक्रिया पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
अधूरी या आंशिक KYC वाले खातों की लेनदेन सीमा कम की जा सकती है।
कुछ मामलों में सेवा अस्थायी रूप से रोकी भी जा सकती है।
पूर्ण KYC वाले खातों को बिना रुकावट सेवा मिलती रहेगी।
इस कदम का उद्देश्य फर्जी खातों और संदिग्ध लेनदेन पर रोक लगाना है। बेहतर होगा कि आप अपने बैंक और ऐप में KYC स्टेटस जांच लें।
यह भी पढ़े:-Ration Card Update 2026: फ्री राशन के साथ बैंक खाते में पैसे, 10 फरवरी से नए नियम लागूफेल्ड ट्रांजेक्शन पर तेज रिफंड
अक्सर ऐसा होता है कि पैसा कट जाता है लेकिन सामने वाले को नहीं पहुंचता। पहले रिफंड आने में कई दिन लग जाते थे।
नए प्रावधान के तहत ऑटो-रिवर्सल सिस्टम को तेज किया जा रहा है। असफल ट्रांजेक्शन की राशि कम समय में वापस खाते में आ जाएगी। इससे यूजर्स को शिकायत दर्ज कराने और बार-बार फॉलोअप करने की जरूरत कम होगी।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन होगा जरूरी
अप्रैल 2026 से सभी UPI भुगतान में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया जाएगा।
- UPI PIN के साथ अतिरिक्त सुरक्षा स्तर जोड़ा जा सकता है, जैसे:
- बायोमेट्रिक सत्यापन
- डिवाइस आधारित वेरिफिकेशन
- डायनामिक कोड
- इससे अनधिकृत लेनदेन का खतरा कम होगा और खातों की सुरक्षा मजबूत होगी।
- बड़े ट्रांजेक्शन पर नजर
यदि किसी खाते में सालभर में बड़ी रकम का लेनदेन होता है और उसका स्पष्ट स्रोत नहीं है, तो जांच की संभावना हो सकती है। ऐसे मामलों में Income Tax Department स्पष्टीकरण मांग सकता है।
व्यवसायिक उपयोग करने वाले लोग अपनी आय और खर्च का रिकॉर्ड सही तरीके से रखें। बैंक स्टेटमेंट और इनवॉइस जैसे दस्तावेज काम आ सकते हैं।
व्यापारियों के लिए जरूरी अपडेट
जो व्यापारी UPI से भुगतान लेते हैं, उनके लिए अनुपालन नियमों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा।
तय सीमा से अधिक सालाना बिक्री होने पर GST पंजीकरण आवश्यक हो सकता है।
बड़े कैशबैक या प्रोत्साहन राशि टैक्स दायरे में आ सकती है।
डिजिटल आय का पूरा रिकॉर्ड रखना और समय पर रिटर्न दाखिल करना जरूरी है।
- आम यूजर्स क्या करें?
- UPI ऐप को हमेशा अपडेट रखें
- KYC पूरा और मोबाइल नंबर अपडेट रखें
- अनजान पेमेंट रिक्वेस्ट स्वीकार न करें
- बड़ी रकम भेजते समय रिसीवर का नाम दोबारा जांचें
- संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें
- डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मिलेगी मजबूती
UPI देश की सबसे तेज रियल-टाइम पेमेंट व्यवस्था बन चुका है। हर महीने करोड़ों लेनदेन इस प्लेटफॉर्म पर होते हैं। ऐसे में समय-समय पर सुरक्षा और निगरानी से जुड़े नियम अपडेट करना जरूरी है।
इन नए बदलावों से धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष
27 फरवरी 2026 से लागू होने वाले UPI नियम भुगतान प्रणाली को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में अहम कदम हैं। आम यूजर्स के लिए ज्यादा चिंता की बात नहीं है, लेकिन जागरूक रहना जरूरी है। KYC पूरा रखें, ऐप अपडेट रखें और सुरक्षित लेनदेन की आदत अपनाएं।
यह भी पढ़े:-26 फरवरी 2026 से नए UPI नियम लागू – बैलेंस लिमिट, ऑटो पे और UPI ID अपडेटFAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. क्या UPI की दैनिक सीमा बदल गई है?
नहीं, सामान्य यूजर्स के लिए ₹1 लाख प्रतिदिन की सीमा पहले जैसी ही है।
Q2. नए UPI आईडी पर कितनी सीमा रहेगी?
पहले 24 घंटे में अधिकतम ₹5,000 तक ट्रांजेक्शन किया जा सकेगा।
Q3. फेल्ड ट्रांजेक्शन का पैसा कब वापस मिलेगा?
नए नियमों के अनुसार ऑटो-रिवर्सल पहले से तेज किया जाएगा, जिससे कम समय में राशि वापस आएगी।
Q4. क्या KYC अनिवार्य है?
हाँ, अधूरी KYC होने पर ट्रांजेक्शन सीमा कम हो सकती है या सेवा रोकी जा सकती है।
Q5. क्या व्यापारियों को टैक्स देना होगा?
यदि सालाना आय तय सीमा से ऊपर है, तो GST पंजीकरण और टैक्स नियम लागू हो सकते हैं।
डिस्क्लेमर:
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। अंतिम निर्णय लेने से पहले संबंधित बैंक या आधिकारिक दिशा-निर्देश अवश्य देखें।
